Balrampur police
 
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History

राजस्व जिला सरगुजा से पृथक होकर दिनांक 15.08.2001 को पुलिस जिला बलरामपुर के रूप में गठन किया गया था। इस जिले का गठन बढ़ती हुई नक्सली गतिविधियों के कारण किया गया था जो दिनांक 16.01.2011 को राजस्व जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के रूप में अस्तित्व में आया। नये परिसीमन के अनुसार जिले का क्षेत्रफल 3806.08 वर्ग कि.मी. है जिसकी कुल जनसंख्या 598855 (वर्ष 2001 के जणगणना के अनुसार) है। जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र प्रतापपुर, रामानुजगंज एवं सामरी है। जिले में छः तहसीलें वाड्रफनगर, कुसमी, रामानुजगंज, शंकरगढ़, राजपुर एवं बलरामपुर है। जिले में एक उप जेल रामानुजगंज में एवं 04 सिविल कोर्ट क्रमशः बलरामपुर, राजपुर, रामानुजगंज एवं वाड्रफनगर में है। जिले की सीमा सरहदी प्रांत झारखण्ड के जिला गढ़वा, लातेहार एवं गुमला, उ.प्र. के सोनभद्र जिला एवं मध्यप्रदेश के जिला सिंगरौली एवं सीधी जिले से लगी हैं। जिले की भौगोलिक स्थिति नदी, नालों, पहाड़ों, जंगलों से परिपूर्ण है। जिले में जोबा जंगल, मानपुर, सेमरसोत, सीतारामपुर, जोकापाट, लहसुनपाट एवं सामरीपाट आरक्षित वन है। जिले का प्रमुख पाठ सामरी पाठ है, जिसकी उॅंचाई समुद्र तल से लगभग 1100 फीट है। जिले की मुख्य नदियॉं कन्हर, चनान, मोरन, महान, सेन्दूर आदि हैं। सभी थाना क्षेत्र पहाडों एवं नदी नालों से घिरे हुए हैं। वर्षा ऋतु में ¬मुख्य सड़क मार्ग के अतिरिक्त वाहन से आवागमन संभव नहीं है। संपूर्ण क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने से संवेदनशील है। जिले के दर्शनीय स्थल तातापानी, पवई जल प्रपात, बच्छराज कुॅंवर, डीपाडीह, पलटन घाट, परेवांदह एवं रकसगंडा इत्यादि हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख जनजातियॉं में गोंड़, कॅंवर, उरांव, चेरवा, पहाड़ी कोरवा, खैरवार, कोड़ाकू इत्यादि निवास करते हैं, जिनकी अपनी पृथक-पृथक स्थानीय बोलियॉं है। क्षेत्र की प्रमुख बोली सरगुजिहा है। इन जनजातियों के प्रमुख नृत्य कर्मा एवं शैला है। अम्बिकापुर-बनारस एवं अम्बिकापुर-गढ़वा तथा वाड्रफनगर-रामानुजगंज राज्य मार्ग है। जिले का मुख्यालय बलरामपुर है एवं छ0ग0 की राजधानी रायपुर से लगभग 450 कि.मी. की दूरी पर है। जिले में कहीं भी रेल्वे लाईन का विस्तार नहीं है किन्तु अम्बिकापुर-बरवाडीह रेल लाईन प्रस्तावित है। निकटतम रेल्वे स्टेशन अम्बिकापुर है, जो जिला मुख्यालय बलरामपुर से 82 कि.मी. की दूरी पर है। जिले में वर्तमान स्थिति में 15 थाने क्रमशः बलरामपुर, पस्ता, रामानुजगंज, रामचन्द्रपुर, सनावल, त्रिकुण्डा, बसंतपुर, रघुनाथनगर, चलगली, शंकरगढ़, कुसमी, चांदो, सामरी, राजपुर, कोरंधा एवं चौकी क्रमशः डबरा, विजयनगर, बरियों, डिण्डो, वाड्रफनगर, बलंगी गणेश मोड़ है तथा आउट पोस्ट मरमा, धनवार एवं सबाग स्थापित है। सभी थाने एवं चौकी जंगल एवं पहाड़ो से घिरे होने के कारण क्षेत्र में नक्सली गतिविधी का आमद-रफ्त 1997 से आज दिनांक तक बना हुआ है। चुंकि बलरामपुर पुलिस जिला का गठन नक्सली गतिविधी की सक्रियता पर रोक लगाने के उद्येश्य से किया गया था। पुलिस जिला स्थापित होने के पश्चात समुचित उपलब्ध साधन-संसाधन से वर्ष 2004 तक जिले में सक्रिय रहे भा.क.पा. माओवादी नक्सली संगठन को पूर्ण रूप से नियंत्रण में किया जा चुका है। जिले के थाना सनावल, रामचन्द्रपुर, रामानुजगंज, बलरामपुर, चांदो, सामरी एवं कुसमी झारखण्ड सरहद थाना रघुनाथनगर म.प्र. एवं उत्तर प्रदेश, थाना बसंतपुर उत्तरप्रदेश से लगा है इनके क्षेत्र झारखण्ड के ढ़ुरकी, चिनिया, रंका, भंडरिया, महुआडांड़, डुमरी थाने, मध्यप्रदेश के थाने बैढ़न तथा उत्तर प्रदेश के बीजपुर, बभनी के क्षेत्र से लगा हुआ है। झारखण्ड के उक्त थाने पूर्ण रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्र है एवं इस क्षेत्र में सक्रिय भा.क.पा. माओवादी के सशस्त्र दस्ता क्रमशः बीरसाय, बड़ा विकास, मृत्युंजय, अक्षय कोरवा (भा.क.पा. माओवादी), बोखा प्रजापति (पी.एल.एफ.आई) जो जिले के क्षेत्र में प्रवेश कर वारदात को अंजाम देकर पुनः झारखण्ड की सीमा पार कर अपने ठिकाने की ओर चले जाते हैं। जिससे पुलिस के द्वारा भा.क.पा. माओवादी पर साकारात्मक कार्यवाही नहीं हो पाती है ।
                        जिला बलरामपुर-रामानुजगंज सीमावर्ती क्षेत्र (झारखण्ड) प्रांत के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से लगा हुआ है। दोनों प्रांतों की समीपता के परिणामस्वरूप आपस में रिश्तेदारियां भी हैं। बोलचाल की भाषा, रीति-रिवाज एक से हैं। भौगोलिक स्थिति भी मिलती जुलती है। प्रारंभ में सरहदी क्षेत्र बिहार (वर्तमान में झारखण्ड) क्षेत्र में कम्यूनिस्ट समर्थित आई.पी.एफ. की गतिविधियॉं सक्रिय रहीं। कालांतर में आई.पी.एफ. का स्थान पर एम.सी.सी. तथा जन मुक्ति मोर्चा (पार्टी यूनिटी) जैसे उग्रवादी वामपंथी संगठनों ने ले लिया। सन् 1971 में पश्चिम बंगाल से जोगीराव निवासी वीरभूमि का आगमन दक्षिण पूर्व कोयला परिक्षेत्र चिरमिरी, जिला सरगुजा (वर्तमान जिला कोरिया) में हुआ था, जिसमें नक्सली गतिविधियॉं इस जिले में प्रारंभ करने का प्रयास किया, परंतु अपनी जडें जमाने में असफल होने पर वह 1973 में वापस चला गया। कालांतर में सरगुजा जिले से लगे (वर्तमान जिला बलरामपुर-रामानुजगंज ) झारखण्ड प्रांत में नक्सलवादी गतिविधियॉं बहुत ज्यादा बढ़ीं झारखण्ड राज्य के अधिकांश जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं। छ.ग. राज्य के जिला बलरामपुर-रामानुजगंज की सीमा झारखण्ड के गढ़वा, पलामू, लातेहार तथा गुमला एवं उ.प्र. के सोनभद्र जिले से मिलती है, जो सभी अत्यधिक नक्सल प्रभावित जिले हैं। इस जिले के गठन के पूर्व वर्ष 1996 से सरगुजा जिले में नक्सली अपराध प्रारंभ हो गये थे। प्रारंभ में इस जिले में एम.सी.सी. पार्टी की नक्सली गतिविधियॉं शुरू हुईं एवं पीपुल्सवार नामक नक्सली संगठन का भी इस जिले में प्रवेश कर सक्रिय हुआ और अपनी जड़ें जमाने में लगे हुए थे। बढ़ती हुई नक्सली गतिविधियों के कारण पुलिस जिला बलरामपुर का गठन दिनांक 15.08.2001 को किया गया। बलरामपुर पुलिस जिला राजस्व जिला सरगुजा के अंतर्गत आता था। एम.सी.सी. एवं पीपुल्सवार का विलय माह सितंबर 2004 में होने के बाद दोनों संगठन मिलकर सी.पी.आई. माओवादी संगठन के नाम से अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।

                        सन् 1990 में आई.पी.एफ. के द्वारा बिहार प्रांत (झारखण्ड) प्रांत के थाना रंका के गोदरमाना में म.प्र. पुलिस के विरूद्ध प्रचार वितरित करवाया गया था। आई.पी.एफ. की सक्रियता 1990 से 1994 तक बलरामपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में परिलक्षित हुई थी। वर्ष 1994 से नक्सली एम.सी.सी. गतिविधियॉं प्रत्यक्षतः एवं अप्रत्यक्षतः दृष्टिगोचर होने लगीं तथा अपने कार्य क्षेत्र. का विस्तार निरंतर इस जिले में करने लगे। माह नवंबर 1996 से बलरामपुर जिले में बिहार प्रांत (झारखण्ड) प्रांत के सक्रिय नक्सवादी संगठन एम.सी.सी. की गतिविधियॉं प्रत्यक्षतः प्रमाणिक तौर दृष्टिगोचर हुईं, जब माह नवंबर 1996 में एम.सी.सी. के सक्रिय सदस्य प्रसिद्ध नाई एवं टिभू उर्फ जगदीश यादव को थाना रामचंद्रपुर के ग्राम लोधा में पकड़ा गया। इसी प्रकार एक अन्य नक्सली संगठन जन मुक्ति मोर्चा (पार्टी यूनिटी) की गतिविधियॉं प्रत्यक्षतः प्रमाणित तौर पर दृष्टिगोचर हुईं, जब दिनांक 20.08.1997 को ग्राम अनिरूद्धपुर, थाना रामचंद्रपुर के गौर सिंह पर जन मुक्ति मोर्चा के सदस्य महमूद मिंयॉं एवं उनके अन्य दो साथियों द्वारा कट्टा से फायर कर हमला किया गया। वर्ष 1998 अक्टूबर में जन मुक्ति मार्चा (पार्टी यूनिटी) का विलय नक्सली संगठन पी.डब्ल्यू.जी. में हो गया। वर्तमान में सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्यरत बिहार (झारखण्ड) प्रांत के नक्सली संगठन सी.पी.आई. (माओवादी) की गतिविधियॉं बलरामपुर जिले के पुलिस अनुविभाग रामानुजगंज, वाड्रफनगर, कुसमी में सक्रिय हैं। जिले के भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए इन संगठनों के द्वारा जिले में नक्सली गतिविधियॉं एवं हिंसक घटनायें घटित की जा रही हैं।

 

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